भोपाल/आई संवाद/ कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने का मामला अब राजनीतिक गलियारों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। इस विवाद के बीच नामांकन पत्र तैयार करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता जे.पी. धनोपिया ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि नामांकन प्रक्रिया में किसी प्रकार की कानूनी या तकनीकी चूक नहीं हुई थी और जिस आधार पर नामांकन निरस्त किया गया, वह वस्तुतः कोई आपराधिक मामला नहीं था।
शपथ पत्र में उल्लेख करना जरुरी नहीं था?
करीब 23 वर्षों से चुनावी नामांकन प्रक्रियाओं से जुड़े धनोपिया का कहना है कि जिस नोटिस को आपराधिक प्रकरण बताकर विवाद खड़ा किया गया, वह केवल एक शिकायत के आधार पर जारी सूचना थी। उसमें न तो किसी आपराधिक प्रकरण का क्रमांक दर्ज था और न ही उसे जारी करने वाले अधिकारी के पास वैधानिक अधिकार थे। ऐसे में शपथ पत्र में उसका उल्लेख करना आवश्यक नहीं था।
‘बीजेपी के बहकावे में नहीं आए विधायक’
उन्होंने आरोप लगाया कि जब भाजपा को यह महसूस हुआ कि कांग्रेस के विधायक उनके प्रभाव क्षेत्र से बाहर हो चुके हैं, तब योजनाबद्ध तरीके से नामांकन रद्द कराने की कोशिश की गई। धनोपिया के अनुसार नामांकन परीक्षण के दौरान ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे कांग्रेस पक्ष को अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने का पूरा अवसर नहीं मिल पाया।
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निर्वाचन अधिकारी पर सवाल
धनोपिया ने बताया कि निर्वाचन अधिकारी से अतिरिक्त समय की मांग की गई थी ताकि संबंधित नोटिस की स्थिति स्पष्ट की जा सके और न्यायालय से प्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत किए जा सकें। हालांकि यह मांग स्वीकार नहीं की गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि उस दौरान भाजपा के कई वरिष्ठ नेता और मंत्री वहां मौजूद थे, जिससे प्रक्रिया पर राजनीतिक प्रभाव पड़ने की आशंका और गहरी हो जाती है।
‘चेकलिस्ट में पूर्ण थे दस्तावेज’
उनका कहना है कि नामांकन दाखिल करते समय निर्वाचन अधिकारी ने सभी दस्तावेजों की प्रारंभिक जांच की थी और किसी प्रकार की कमी या आपत्ति दर्ज नहीं की गई थी। चेकलिस्ट में भी सभी दस्तावेज पूर्ण पाए गए थे। इसके बावजूद बाद में अचानक आपत्ति उठाकर नामांकन निरस्त कर दिया गया।
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‘कांग्रेस को नहीं दिया पर्याप्त सुनवाई का वक्त’
धनोपिया के मुताबिक नामांकन जमा होने के कुछ समय बाद भाजपा की ओर से एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीश आपत्ति दर्ज कराने पहुंचे, जिसके बाद पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। उनका आरोप है कि कांग्रेस को पर्याप्त सुनवाई का अवसर दिए बिना निर्णय लिया गया, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
‘नोटिस का उल्लेख नहीं करने से विवाद’
जेपी धनोपिया ने स्वीकार किया कि यदि विवादित नोटिस का उल्लेख शपथ पत्र में कर दिया जाता तो संभवतः इतना बड़ा विवाद पैदा नहीं होता। लेकिन उनका स्पष्ट मत है कि कानून की दृष्टि से उस नोटिस को आपराधिक प्रकरण की श्रेणी में रखना उचित नहीं था।
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बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दा बना
दूसरी ओर कांग्रेस ने इस मामले को अदालत में चुनौती देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी जल्द ही हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर सकती है। साथ ही प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर विरोध कार्यक्रमों की रणनीति भी बनाई जा रही है। ऐसे में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन विवाद अब केवल चुनावी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में एक बड़े संवैधानिक और राजनीतिक मुद्दे के रूप में उभरता जा रहा है।
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