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MP में पांच शहरों का बदलेगा विकास मॉडल: भोपाल-इंदौर समेत 5 शहरों में बनेगी मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी, 19 हजार वर्ग किमी क्षेत्र होगा विकसित

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भोपाल। मध्यप्रदेश में शहरों के सुनियोजित और एकीकृत विकास की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य मंत्रिमंडल ने मध्यप्रदेश मेट्रोपॉलिटन नियोजन एवं विकास अधिनियम 2025 के मसौदे को मंजूरी दे दी है। इसके तहत प्रदेश के भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और उज्जैन में मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी गठित करने की योजना है। शुरुआत प्रदेश के दो प्रमुख शहरों भोपाल और इंदौर से होगी। दोनों शहरों के आसपास के बड़े क्षेत्र को एक साथ विकसित करने के लिए अलग-अलग मेट्रोपॉलिटन रीजन तैयार किए जाएंगे।

भोपाल और इंदौर में करीब 19 हजार वर्ग किमी क्षेत्र का विकास

पहले चरण में भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन का क्षेत्र करीब 9,600 वर्ग किलोमीटर, जबकि इंदौर रीजन का क्षेत्र लगभग 10 हजार वर्ग किलोमीटर रखा गया है। इस तरह दोनों क्षेत्रों को मिलाकर करीब 19 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में सड़क, परिवहन, उद्योग, आवास, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं का एकीकृत विकास किया जाएगा। इसके लिए मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी (MPC) और मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MRDA) जैसी संस्थाओं का गठन किया जाएगा।

इंदौर रीजन में पांच जिले होंगे शामिल

इंदौर मेट्रोपॉलिटन रीजन में इंदौर, देवास, उज्जैन, धार और शाजापुर को शामिल किया गया है। इस क्षेत्र में करीब 55 लाख की वर्तमान आबादी बताई जा रही है, जबकि भविष्य में करीब 75 लाख की आबादी को ध्यान में रखकर विकास की योजना तैयार की जाएगी। इंदौर विकास प्राधिकरण को इसकी नोडल एजेंसी बनाया गया है।

इंदौर रीजन के विकास में सिंहस्थ 2028 को भी महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। क्षेत्र में औद्योगिक और व्यापारिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े क्षेत्रों को बेहतर कनेक्टिविटी देने पर जोर रहेगा। देवास, पीथमपुर, उज्जैन और बदनावर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को सड़क, रेल और अन्य परिवहन सुविधाओं से जोड़ने की योजना है।

भोपाल रीजन में पांच जिले और ब्यावरा शामिल

भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन में भोपाल, सीहोर, रायसेन, विदिशा और राजगढ़ जिले के ब्यावरा क्षेत्र को शामिल किया गया है। पूरे क्षेत्र का विस्तार करीब 9,600 वर्ग किलोमीटर होगा। भोपाल विकास प्राधिकरण को रीजन के विकास के लिए नोडल एजेंसी बनाया गया है। वर्तमान आबादी करीब 35 लाख मानी जा रही है, जबकि भविष्य में 60 लाख की संभावित आबादी के अनुसार विकास का खाका तैयार किया जाएगा।

सरकार की योजना के मुताबिक अगले करीब 14 महीनों में शामिल क्षेत्रों का सर्वे और अध्ययन कर रीजनल डेवलपमेंट एवं इन्वेस्टमेंट प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें जनसंख्या, उद्योग, जमीन के उपयोग, परिवहन, जल संसाधन और भविष्य की जरूरतों का अध्ययन किया जाएगा।

चार चरणों में तैयार होगा पूरा डेवलपमेंट प्लान

मेट्रोपॉलिटन रीजन के विकास की प्रक्रिया को चार प्रमुख चरणों में पूरा किया जाएगा। इसमें प्रारंभिक चरण, स्थिति का विश्लेषण, रीजनल एवं इन्वेस्टमेंट प्लान और इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) शामिल होगी। पहले चरण में क्षेत्र, जिले, तहसील और गांवों की सीमा तय करने का काम किया जा चुका है। अब अलग-अलग क्षेत्रों का विस्तृत डेटा जुटाकर उनकी जरूरतों और विकास की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।

इसके बाद यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में उद्योग, आवासीय कॉलोनी, टाउनशिप, लॉजिस्टिक पार्क, परिवहन सुविधा या अन्य बुनियादी ढांचा विकसित किया जाना है। अंतिम चरण में परियोजनाओं की लागत, इंजीनियरिंग और कार्ययोजना के आधार पर DPR तैयार की जाएगी।

मुख्यमंत्री होंगे महानगर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष

विधानसभा से एक्ट को मंजूरी मिलने के बाद मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्तावित व्यवस्था में मुख्यमंत्री को अथॉरिटी का अध्यक्ष बनाए जाने की योजना है। अथॉरिटी क्षेत्र के लिए दीर्घकालीन विकास योजना तैयार करने के साथ उसके क्रियान्वयन में भी भूमिका निभाएगी। वहीं मेट्रोपॉलिटन प्लानिंग कमेटी विभिन्न विकास प्राधिकरणों, नगरीय निकायों और जिला पंचायतों के बीच समन्वय स्थापित करेगी।

उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

मेट्रोपॉलिटन रीजन बनने के बाद औद्योगिक क्षेत्रों को आसपास के शहरों और परिवहन नेटवर्क से जोड़ने पर जोर रहेगा। भोपाल क्षेत्र में मंडीदीप और अचारपुरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार तथा बेहतर कनेक्टिविटी की योजना है। इंदौर क्षेत्र में पीथमपुर और आसपास के इलाकों को मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने की तैयारी है।

इसके अलावा नई टाउनशिप, सड़कें, पुल, लॉजिस्टिक पार्क, सीवरेज, स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज और अन्य शहरी सुविधाओं का विकास किया जाएगा। टेक्सटाइल, ऑटोमोबाइल, फार्मा और कृषि आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर बनने की उम्मीद है।

परिवहन व्यवस्था के लिए बनेगी एकीकृत व्यवस्था

मेट्रोपॉलिटन रीजन में पब्लिक ट्रांसपोर्ट को एक-दूसरे से जोड़ना भी योजना का अहम हिस्सा है। मेट्रो, रेलवे, एयरपोर्ट, हाईवे और रैपिड ट्रांजिट जैसी सुविधाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जाएगा। ट्रैफिक मैनेजमेंट और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े विभागों के बीच समन्वय के लिए अलग ट्रांसपोर्ट व्यवस्था विकसित करने की योजना है।

पर्यावरण और जल संसाधनों पर भी फोकस

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी योजना में शामिल किया गया है। कैचमेंट एरिया, जल स्रोत, भूजल रिचार्ज और बाढ़ नियंत्रण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा पुरातात्विक स्थलों और पर्यटन क्षेत्रों के संरक्षण एवं विकास के लिए भी योजनाएं तैयार की जाएंगी।

मौजूदा विकास प्राधिकरणों की भूमिका बनी रहेगी

मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी बनने के बाद मौजूदा विकास प्राधिकरणों को पूरी तरह खत्म करने के बजाय उनके काम का क्षेत्र स्पष्ट किया जाएगा। शहरों के भीतर मौजूदा विकास प्राधिकरण अपनी भूमिका निभाते रहेंगे, जबकि उनके बाहर के बड़े क्षेत्र में मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी प्लानिंग और समन्वय का काम करेगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग शहरों और जिलों में चल रही विकास योजनाओं को एक साझा योजना के तहत आगे बढ़ाना है।

सरकार की इस योजना से मध्यप्रदेश में तेजी से बढ़ते शहरी क्षेत्रों को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से विकसित करने की उम्मीद है। खास तौर पर भोपाल और इंदौर के आसपास बढ़ते शहरीकरण को नियंत्रित करने, औद्योगिक निवेश बढ़ाने और परिवहन व्यवस्था को बेहतर बनाने में मेट्रोपॉलिटन रीजन महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।