धार/आई संवाद/ धार की भोजशाला के मामले में 15 मई को इंदौर हाईकोर्ट ने निर्णय सुनाया था, जिसमें भोजशाला को हिंदू मंदिर करार दिया गया, और सालभर सामान्य मंदिर के अनुसार ही पूजा-अर्चना करने की इजाजत दी गई, मुस्लिम पक्ष के लिए कहा गया कि वो चाहे तो अन्य जगह पर जमीन की मांग कर सकते हैं। वहीं अब भोजशाला का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है, हाईकोर्ट के फैसले के बाद तीसरी याचिका दायर की गई है। जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अब नजर रहेगी।
तीसरी याचिका की दायर
जिब्रान अंसारी ने सुप्रीम कोर्ट में तीसरी याचिका दायर की है, जिसमें अपील की गई है कि हाईकोर्ट के फैसले को निरस्त कर भोजशाला को मस्जिद घोषित किया जाए। इसके पहले काजी मुइनुद्दीन और मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी ने भी निर्णय को चुनौती दी है, हालांकि अब तक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरु नहीं हुई है। बता दें कि 15 मई को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इंदौर हाईकोर्ट ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और कुलदीप तिवारी की याचिकाओं पर भोजशाला को मंदिर माना था।
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हाईकोर्ट के फैसले में ये था खास
भोजशाला के मामले में इंदौर हाईकोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए एएसआई के 7 अप्रैल 2003 के आदेश को रद्द कर दिया था। जिसके तहत मुस्लिम पक्ष को हर शुक्रवार दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज पढ़ने की इजाजत दी गई थी। वहीं इस मुद्दे पर एक पक्ष अपनी ऐतिहासिक जीत बता रहा है, तो दूसरा पक्ष अपने साक्ष्यों की अनदेखी की बात कर रहा है, हालांकि आने वाले वक्त में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर सबकी नजर होगी, उसकी से साफ होगा कि भोजशाला पर किस पक्ष का दावा सही है।
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