इंदौर/आई संवाद/ किसी भी शहर की बनावट में सबसे महत्वपूर्ण होता है कि कौनसा इलाका रहवासी क्षेत्र में आता है, और कौनसे इलाकों में व्यापारिक प्रतिष्ठान होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कड़ा आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को देशभर के आवासीय क्षेत्रों में बढ़ते व्यावसायिक उपयोग पर नाराजगी जाहिर की है और कहा कि ‘लैंड यूज बदलना सिस्टम से धोखा है।’ जिसके बाद कोर्ट ने सभी नगरीय निकायों और विकास प्राधिकरणों को निर्देशित करते हुए सितंबर तक राज्यों से रिपोर्ट भी मांगी है।
इंदौर पर पड़ेगा बड़ा असर
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंदौर पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि यहां पर धड़ल्ले से आवासीय इलाके कमर्शियल में बदले हैं। जिसके कारण पार्किंग की समस्या ने विकराल रुप ले लिया। नगर निगम ने कुछ दिन पहले सर्वे कराया था, जिसमें सामने आया कि शहर में 1 लाख 28 हजार से ज्यादा मकानों का उपयोग आवासीय के बजाय व्यावसायिक गतिविधियों में हो रहा है। साथ ही अन्य उपयोग में भी इनका उपयोग किया जा रहा है, जिनमें कि दुकानें, बैंक, होस्टल, ऑफिस, क्लिनिक, शोरूम और कोचिंग शामिल हैं।
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निर्देश की जद में कई इलाके
इंदौर में फुली कमर्शियल के साथ एक परंपरा और शुरु हुई थी कि मकान के साथ नीचे एक दुकान निकाल ली जाए। निगम के सर्वे में सामने आया है कि 22 हजार 335 मकानों में आंशिक रूप से व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं। कई पुराने इलाके तो पूरी तरह से कमर्शियल हो गए हैं, जिसका सबसे बड़ा केंद्र राजबाड़ा का इलाका है, जहां पर रहवासी घरों में गोदाम बन गए है। वहीं दूसरी तरफ शहर के पश्चिमी इलाके सपना-संगीता रोड, स्कीम 74, 78, नरेंद्र तिवारी मार्ग, अन्नपूर्णा रोड, रणजीत हनुमान रोड जैसे इलाकों में अधिकतर जगह पर व्यावसायिक उपयोग होता नजर आ रहा है।
क्या कहता है नियम?
व्यासायिक उपयोग को लेकर नियम कहते हैं कि 12 मीटर या उससे चौड़ी सड़क पर स्थित आवास में सीमित कमर्शियल उपयोग की अनुमति दी जा सकती है। कई मामलों में प्लॉट का आधा हिस्सा या 75 वर्गमीटर तक व्यावसायिक गतिविधि का प्रावधान किया गया है। प्रमुख मार्गों को लेकर नियम कहता है कि 30 मीटर तक कमर्शियल गतिविधि की अनुमति दी जा सकती है।
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