इंदौर/आई संवाद/ मनुष्य अपने ईश्वर को साक्षात मानकर चलता है, इसी का नतीजा है कि प्रत्येक मौसम के अनुसार ही भगवान को भोग अर्पित किया जाता है। ज्येष्ठ मास और नवतपा का तपिश को देखते हुए भक्तों ने भगवान की दिनचर्या बदल दी है, मंदिरों में अपने ईष्ट को ठंडे व्यंजनों का भोग अर्पित किया जा रहा है और दोपहर में विश्राम के समय में भी बढ़ोतरी कर दी गई है, ताकि आराध्य को किसी तरह की मौसम की पीड़ा का सामना ना करना पड़े।
खजराना गणेश की दिनचर्या में बदलाव
इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर के पुजारी पंडित अशोक भट्ट और नानू भट्ट ने बताया कि गजानन को भीषण गर्मी से दूर रखने के लिए 24 घंटे एसी चलाया जा रहा है। भोग के रुप में लड्डू के साथ श्रीखंड, ठंडी रसमलाई, छेने के रसगुल्ले, आमरस और दही-मलाई का भोग लगाया जा रहा है। इसी तरह बड़ा गणपति में भी भगवान के लिए कूलर की व्यवस्था की गई है, ताकि तपिश का असर ना हो। इसी तरह शहर के छत्रीबाग स्थित श्री लक्ष्मी वेंकटेश देवस्थान, एमआर-10 हनुमान मंदिर, परदेशीपुरा के गेंदेश्वर महादेव मंदिर, पश्चिम क्षेत्र के रणजीत हनुमान मंदिर, मल्हारगंज राम-कृष्ण मंदिर में भगवान को रोहिणी की गर्मी से दूर रखने के इंतजाम किए गए हैं।
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भारतीय परंपरा में नवतपा बेहद खास
भारतीय संस्कृति और परंपराओं में नवतपा का विशेष स्थाना माना गया है। इन दिनों में भगवान को शीतलता प्रदान कर भक्त अपनी मनोकामना पूर्व कर सकता है। इसी के चलते शिवलिंग पर फलों का रस, जल और खस को अर्पित किया जाता है, ताकि भगवान शीतलता का आभास कर भक्त की आकांक्षा को पूरा करें। इसी तरह कई लोग इन दिनों में पानी के मटके (घड़े), छाता, पंखे, सत्तू और मीठे शरबत का दान कर पुण्य लाभ कमाते हैं।
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