इंदौर/आई संवाद/ इंदौर की सियासत में बड़ा फेरबदल तक देखने को मिला, जब जनपद सदस्य विशाल मालवीय ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। विशाल ने अपने इस्तीफे में लिखा कि जो लोग केवल नेताओं के आगे पीछे घूमकर व्यक्तिगत लाभ साधने में लगे हैं, उन्हें संगठन में पद व प्रतिष्ठा प्रदान की जा रही है। वर्षों से पार्टी के लिए समर्पित कार्यकर्ताओं को लगातार उपेक्षित कर हाशिये पर धकेला जा रहा है। संगठन में आज स्वयं को उपेक्षित व असहज महसूस करना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण है।
बड़े राजनीतिक परिवार से विशाल का ताल्लुक
इंदौर जनपद पंचायत में सदस्य विशाल मालवीय पूर्व पीसीसी चीफ और पूर्व मंत्री राधाकिशन मालवीय के पोते, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कांग्रेस के पूर्व लोकसभा और विधानसभा में प्रत्याशी रहे राजेंद्र मालवीय के बेटे हैं। साथ ही कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गेहलोत के दामाद हैं। जिसके चलते कयास लगाए जा रहे हैं कि वो आने वाले वक्त में बीजेपी के कैंप में जाकर आगे की राजनीतिक यात्रा को आगे बढ़ाएंगे।
क्या पिता लगातार हार से लिया सबक?
विशाल के पिता राजेंद्र मालवीय कांग्रेस के टिकट पर कई चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने सांवेर, तराना से विधानसभा का चुनाव लड़ा लेकिन वो दोनों चुनाव हार गए, इसी तरह पिछले चुनाव में कांग्रेस की तरफ से देवास-शाजापुर लोकसभा सीट पर भाग्य आजमाया, उसमें भी उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। वैसे विशाल के कांग्रेस छोड़ने के बाद उन्होंने कहा कि वो अभी भी अजा विभाग प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष हैं, कांग्रेस के साथ है।
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राधाकिशन मालवीय का राजनीतिक सफर
इंदौर जिले के बिचौली हप्सी में रहने वाले राधाकिशन मालवीय का राजनीतिक सफर बेहद ही लंबा रहा है। दलित नेता के रुप में अपनी पहचान बनाने वाले मालवीय कांग्रेस के शासनकाल में दो बार प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। राजीव गांधी के वक्त केंद्र सरकार में श्रम एवं संसदीय कार्य मंत्री के रूप में सेवा दे चुके हैं। वे एक बार सांवेर से विधायक भी रहे हैं, तीन बार राज्यसभा भेजे गए, वे इंदौर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। जिसके चलते माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में विशाल के पार्टी छोड़ने से कांग्रेस के सामने मुश्किल खड़ी हो सकती है, खासकर ग्रामीण इलाके में पार्टी को एक बड़े वोटबैंक का नुकसान उठाना पड़ सकता है।
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