भोपाल/आई संवाद/ मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर उपजा राजनीतिक विवाद अब व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप लेने जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने के बाद पार्टी ने भाजपा और निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर हमला बताते हुए पूरे प्रदेश में तीन दिवसीय आंदोलन की घोषणा की है।
निष्पक्षता के सिद्धांत की अनदेखी
पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में निष्पक्षता के सिद्धांतों की अनदेखी की गई है। कांग्रेस ने मामले को लेकर विभिन्न संवैधानिक मंचों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई, लेकिन कहीं से राहत नहीं मिलने पर अब जनता के बीच जाने का फैसला लिया गया है। राष्ट्रपति से मुलाकात का अवसर नहीं मिलना, निर्वाचन आयोग द्वारा आपत्ति अस्वीकार किया जाना और सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका पर सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद कांग्रेस ने आंदोलन की रणनीति तैयार की है।
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चरणबद्ध तरीके से विरोध प्रदर्शन
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के मार्गदर्शन में यह विरोध कार्यक्रम चरणबद्ध तरीके से आयोजित होगा। 15 जून को युवा कांग्रेस, 16 जून को एनएसयूआई और 17 जून को महिला कांग्रेस प्रदेशभर में प्रदर्शन करेगी। जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन, निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध कार्यक्रम, भाजपा कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन और पुतला दहन जैसी गतिविधियां प्रस्तावित हैं।
राजनीतिक माहौल और गर्माने के संकेत
राज्यसभा चुनाव से जुड़ा यह मामला अब केवल एक चुनावी विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति में नए संघर्ष का केंद्र बनता दिखाई दे रहा है। आगामी दिनों में कांग्रेस के आंदोलन की दिशा और भाजपा की प्रतिक्रिया से प्रदेश का राजनीतिक माहौल और अधिक गर्माने के संकेत मिल रहे हैं। मीनाक्षी नटराजन के नामांकन का मुद्दा अब मध्यप्रदेश की सियासत में बड़े टकराव की पृष्ठभूमि तैयार करता नजर आ रहा है।
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