भोपाल/आई संवाद/ मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए आज का दिन बेहद ही सोचने वाला है, कि आखिर इतनी बड़ी चूक उससे या उसकी राज्यसभा कैंडिडेट मीनाक्षी नटराजन से कैसे हो गई, कि बिना चुनाव लड़े ही उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा, जबकि कांग्रेस के नेता इतने कॉन्फिडेंट नजर आ रहे थे कि दावा किया जा रहा था हम सभी एकजुट हैं, बल्कि ये कहें कि काफी दिनों के बाद कांग्रेस में विरोध के स्वर भी सुनाई दिए, तो वो भी काफी छिटपुट तरीके से, तो आखिर मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने में किसकी गलती है, ये बात सामने आना चाहिए।
क्या मीनाक्षी नटराजन को नहीं पता था केस के बारे में?
दरअसल, भाजपा ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई थी। भाजपा का आरोप था कि नटराजन ने नामांकन फॉर्म में आवश्यक जानकारी पूरी तरह से पेश नहीं की है। विशेष रूप से उन पर आपराधिक प्रकरणों से संबंधित जानकारी छिपाने का आरोप लगाया गया था। जिसमें बीजेपी ने प्रमाण प्रस्तुत किए, जिसमें नटराजन पर साल 2025 के प्रकरण की जानकारी दी गई, वहीं जांच के दौरान रिटर्निंग अधिकारी ने आपत्तियों और उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण किया, जिसके बाद उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया। जिसमें सवाल बनता है कि क्या मीनाक्षी नटराजन को अपने पर केस की जानकारी नहीं थी।
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मुख्यमंत्री, बीजेपी नेताओं के दावों में निकला दम
राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर भाजपा नेताओं का कॉन्फिडेंस गजब का था, पहले कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कांग्रेस के खाते में जाने वाली सीट पर दावा ठोंकने की बात कही थी। तो उसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर दौरे के दौरान तीसरी सीट पर भाजपा उम्मीदवार उतारने के सवाल पर कहा, ‘तीसरी सीट जाएगी कहां?’ इसी तरह से लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह भी पार्टी की तैयारियों का उल्लेख कर चुके थे।
जिसका परिणाम कुछ दिन बाद सामने आ गया, और बीजपी ने महेश केवट को राज्यसभा की तीसरी सीट पर उतार दिया, और अब वो मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद निर्विरोध चुन लिए गए हैं।
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