इंदौर/आई संवाद/ वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और बुंदेलखंड केसरी महाराजा छत्रसाल की 377वीं जयंती के अवसर पर शहर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। भगवा ध्वज के साथ क्षत्रिय समाज सड़कों पर निकला और आसमान को जय भवानी-जय राणा के जयघोष से गूंजायमान कर दिया। जयंती समारोह के दौरान सिर पर पगड़ी पहने क्षत्रिय रणबांकुरे और राजपूताना वस्त्रों में सजी क्षत्राणियों ने महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और शौर्य यात्रा के जरिए महान योद्धाओं को नमन किया। इस मौके पर वीर महाराणा प्रताप की महू नाका स्थित प्रतिमा और बॉम्बे हॉस्पिटल चौराहा स्थित महाराजा छत्रसाल की प्रतिमा पर दीपदान और भव्य आतिशबाजी की गई।
समारोह में दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
महान योद्धाओं वीर महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल की जयंती के मौके पर समाजजनों ने पर्यावरण संरक्षण का भी नारा बुलंद किया। समारोह में जल संरक्षण और पर्यावरण जागरुकता का संदेश देने वाली झांकी को भी शामिल किया गया। जिसको लेकर शौर्य यात्रा के आयोजकों का कहना है कि शौर्य के साथ-साथ वातावरण को हर तरह से शुद्ध बनाने की कोशिश की जाना चाहिए। इसके लिए समाज कंधे से कंधा मिलाकर चलता रहेगा। यात्रा में लोगों से आने वाले मानसून सीजन में एक पेड़ अवश्य लगाने की अपील भी की गई।
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डॉ. दीप्ति सिंह हाड़ा ने मंच से दिया संदेश
देश के महान रणबांकुरों की जयंती पर आयोजित भव्य शौर्य यात्रा में डॉ. दीप्ति सिंह हाड़ा भी शामिल हुईं। जिन्होंने मंच के माध्यम से संदेश दिया कि वीरता, स्वाभिमान, राष्ट्रभक्ति और त्याग के प्रतीक महाराणा प्रताप और महाराजा छत्रसाल का जीवन आदर्शों की वो कुंजी है, जिस पर चलकर समाज उच्च शिखर को छू रहा है। उनका संघर्ष और संकल्प आज भी हम सभी को राष्ट्र एवं समाज के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देता है। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे महान योद्धाओं की जयंती पर भव्य शोभा यात्रा के जरिए सामाजिक एकता प्रकट की जाती है, जिसमें आने वाले वक्त और भी ऊंचाईयां छूने की जरुरत है, जिस पर समाजजन विचार करें, ताकि किसी भी तरह की कमी को दूर किया जा सके।
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