इंदौर/आई संवाद/ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने इंदौर प्रवास के दौरान शहर के जल संकट को लेकर बैठक ली थी। जिसमें उन्होंने साफतौर पर निर्देश दिए थे कि जनता को शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उसके बाद अब नगर निगम ने प्रत्येक घर तक पानी पहुंचाने के लिए प्लान तैयार करने के साथ भागीरथपुरा जल कांड से भी सबक लिया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल की पहल पर जल परीक्षण प्रयोगशाला को अत्याधुनिक मशीनों से लैस किया जा रहा है।
नगर निगम की लैब होगी अत्याधुनिक
नगर निगम ने जल परीक्षण लैब में बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्टिंग के लिए नई आधुनिक मशीनें और आवश्यक सामग्री खरीदने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। जिस 42 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च आएगा। नई तकनीक के बाद महीने में करीब 2 हजार सैम्पल की जांच की जाएगी। इन मशीनों के जरिए टोटल कोलीफॉर्म, ई कोलाई और फिकल कॉलोफॉर्म की जांच अंतर्राष्ट्रीय मानकों के आधार पर की जाएगी। सारी प्रक्रिया वैज्ञानिक पद्धति पर आधारित होगी। इसे एनएबीएल एक्रेडिटेशन के मानको के अनुरुप विकसित किया जा रहा है।
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पेयजल की निगरानी पर नजर
घर-घर में शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लिए नगर निगम ने प्लान भी तैयार किया है। समय-समय पर संवेदनशील इलाकों में पानी की टेस्टिंग की जाएगी। खासतौर पर उन इलाकों पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा, जहां पर तंग गलियां होने से पानी और ड्रैनेज की लाइन पास-पास है, क्योंकि भागीरथपुरा जल कांड के समय भी यहीं परेशानी निकलकर सामने आई थी, जिसमें ड्रैनेज और पानी की लाइन का पास-पास होना जल को दूषित करने का प्रमुख कारण था।
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