Court Munshi Controversy

इंदौर जिला कोर्ट में मुंशियों की भूमिका पर उठे सवाल… अधिवक्ताओं ने जिला न्यायाधीश को सौंपा ज्ञापन!

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इंदौर/आई संवाद/ इंदौर जिला न्यायालय परिसर में मुंशियों की कार्यप्रणाली को लेकर अधिवक्ताओं ने गंभीर चिंता जताई है। गुरुवार को वकीलों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला न्यायाधीश को आवेदन सौंपकर आरोप लगाया कि कुछ मुंशी न्यायिक प्रक्रिया में निर्धारित सीमा से अधिक हस्तक्षेप कर रहे हैं, जिससे अधिवक्ताओं की वैधानिक भूमिका प्रभावित हो रही है।

पक्षकारों से सीधे संपर्क करने का आरोप
अधिवक्ताओं के अनुसार, विशेष रूप से मोटर वाहन अधिनियम के तहत दर्ज ड्रिंक एंड ड्राइव मामलों में कुछ मुंशी सीधे तौर पर पक्षकारों से संपर्क कर प्रकरणों के संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका कहना है कि इससे न्यायिक प्रक्रिया की शुचिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

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न्यायिक व्यवस्था में दखल का आरोप
एडवोकेट राजेश खंडेलवाल ने बताया कि चालान पेशी के दौरान संबंधित व्यक्तियों को यह समझाया जाता है कि उन्हें अधिवक्ता की सेवाएं लेने की आवश्यकता नहीं है और मुंशियों के माध्यम से ही उनका मामला आसानी से निपट सकता है। उन्होंने इसे न्यायिक व्यवस्था में अनधिकृत दखल करार दिया।

आर्थिक लाभ लेकर प्रकरणों के निस्तारण का आरोप
अधिवक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में आर्थिक लाभ लेकर प्रकरणों के निस्तारण का प्रयास किया जाता है। उनका कहना है कि ऐसी गतिविधियां न केवल वकीलों के पेशेवर अधिकारों को प्रभावित करती हैं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती हैं।

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जिला न्यायाधीश से की शिकायत
वकीलों के मुताबिक, इस विषय में पूर्व में भी न्यायालय प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया गया था, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकल सका। इसी कारण अधिवक्ता समुदाय ने एक बार फिर संगठित होकर जिला न्यायाधीश के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है।

कथित गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की मांग
ज्ञापन में मांग की गई है कि न्यायिक कार्यवाही में केवल अधिकृत व्यक्तियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए तथा मुंशियों की कथित गतिविधियों की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए। इस संबंध में न्यायालय प्रशासन ने अधिवक्ताओं को उचित परीक्षण और आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

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