भोपाल/आई संवाद/ मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारतीय जनता पार्टी द्वारा तीसरी राज्यसभा सीट के लिए महेश केवट को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद चुनावी मुकाबला और अधिक दिलचस्प हो गया है। भाजपा के इस फैसले ने कांग्रेस की चिंताओं को भी बढ़ा दिया है, जिसके चलते पार्टी अपने विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति तैयार कर रही है।
कांग्रेस देगी एकता का संदेश
कांग्रेस की राज्यसभा प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन के नामांकन के दौरान कांग्रेस पार्टी शक्ति प्रदर्शन की तैयारी में है। इस मौके पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह समेत कांग्रेस विधायक दल के सभी सदस्य मौजूद रहेंगे। पार्टी नेतृत्व ने विधायकों को निर्देश दिए हैं कि वे नामांकन प्रक्रिया में अनिवार्य रूप से शामिल होकर संगठन की एकजुटता प्रदर्शित करें।
कांग्रेस विधायकों को एक साथ रखने की तैयारी
भाजपा के तीसरे उम्मीदवार के मैदान में उतरने के बाद राजनीतिक गलियारों में संभावित क्रॉस वोटिंग और विधायकों को प्रभावित करने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इसी को देखते हुए कांग्रेस अपने विधायकों की बाड़ाबंदी की योजना पर विचार कर रही है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी अपने विधायकों को मतदान तक किसी सुरक्षित स्थान पर रखने की तैयारी में है। इसके लिए बेंगलुरु और हैदराबाद के रिसॉर्ट्स को संभावित विकल्प माना जा रहा है। मतदान 18 जून को होना है और तब तक विधायकों को एक साथ रखा जा सकता है। इसी बीच कांग्रेस की तरफ से विधायक आरिफ मसूद और पूर्व विधायक कुणाल चौधरी को दिल्ली रवाना किया गया है, जोकि विधायकों को सुरक्षित रखने की योजना पर काम करेंगे।
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पीसीसी चीफ जीतू पटवारी का दावा
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया है कि कांग्रेस के सभी विधायक पार्टी के साथ मजबूती से खड़े हैं और मीनाक्षी नटराजन की जीत सुनिश्चित है। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सत्ता पक्ष के पास संसाधनों की कोई कमी नहीं है, लेकिन कांग्रेस अपने जनप्रतिनिधियों के भरोसे और एकजुटता के दम पर चुनाव लड़ेगी।
समर्थन जुटाने निकली मीनाक्षी नटराजन
दूसरी ओर, मीनाक्षी नटराजन ने भी समर्थन जुटाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। उन्होंने रविवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव से मुलाकात की, जहां विधायक सचिन यादव भी मौजूद रहे। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य विधायकों और वरिष्ठ नेताओं से भी संपर्क साधकर चुनावी रणनीति पर चर्चा की। राज्यसभा की तीसरी सीट को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच छिड़ी यह लड़ाई अब केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। दोनों दल इसे अपनी राजनीतिक साख और संगठनात्मक ताकत से जोड़कर देख रहे हैं। जिसके परिणाम आने वाले वक्त में ही देखने को मिलेंगे।
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