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दिग्विजय सिंह का ‘मिशन 2028’… दलित, अल्पसंख्यकों के जरिए सत्ता में आने की तैयारी

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भोपाल/आई संवाद/ पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राज्यसभा जाने से इनकार कर दिया है, उनके इस निर्णय के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता समेत जनता चौंक गई थी, कि इस तरह से पद का त्याग दिग्विजय सिंह क्यों कर रहे हैं, लेकिन अब साफ हो गया है कि दिग्विजय सिंह साल 2018 की जीत को दोहराना चाहते हैं, उस समय उन्होंने नर्मदा यात्रा के जरिए कार्यकर्ताओं को एकजुट करने का काम किया था, साथ ही पंगत में संगत के जरिए कार्यकर्ताओं का भरोसा जीता था, उसी का नतीजा था कि कांग्रेस एक बार फिर सत्ता की चौखट पर आ गई थी।

मिशन 2028 पर निकले दिग्विजय सिंह
दिग्विजय सिंह ने ‘मिशन 2028’ पर काम करना शुरु कर दिया है। कांग्रेस को मजबूत करने के लिए वे नया राजनीतिक प्रयोग करने जा रहे हैं। इसकी शुरुआत ग्वालियर-चंबल अंचल से की गई है।  यहां मुस्लिम अल्पसंख्यकों और अनुसूचित वर्ग को एक मंच पर स्थान देकर आगे की रणनीति का खुलासा कर दिया, जोकि किसी जमाने में कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक हुआ करता था। परंतु संघ और बीजेपी की मेहनत के चलते अनुसूचित जाति वर्ग का एक बड़ा धड़ा कमल के बटन पर क्लिक करने लगा।

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सामाजिक संगठन ‘मुहब्बत की दुकान’ का कार्यक्रम
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह की अगुवाई में पूर्व मंत्री बालेंदु शुक्ला के सामाजिक संगठन ‘मुहब्बत की दुकान’ के बैनर तले कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। रामाजी का पुरा स्थित हस्सू-हद्दू खां सभागार में मुस्लिम और अनुसूचित जाति वर्ग का संयुक्त सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम स्थल का चुनाव भी ऐसी जगह किया गया, जहां पर दोनों वर्गों की खासी आबादी है, इस इलाके के दोनों वर्ग भाजपा से फिलहाल दूरी बनाए हुए हैं, इसीलिए कार्यक्रम के जरिए इनको अभी से साधने की कवायद की गई। जिसमें दोनों वर्गों को सम्मानित किया गया।

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