इंदौर/आई संवाद/ मां की ममता का कोई मोल नहीं होता, एक वो ही है, जो अपने बच्चे में संस्कारों का पोषण करती है, एक छोटे से पौधे को सींचकर विशाल वृक्ष बनने तक सहारा देती है। जीवन की पहली गुरु मां होती है, मां की इसी ममता का मोल एक बार फिर देखने को मिला, जब इंदौर बीजेपी की नगर उपाध्यक्ष डॉ. दीप्ति सिंह हाड़ा का एक फोटो सोशल मीडिया पर साझा हुआ, इसमें वो अपने बेटे के लिए छुट्टी के दिनों के लिए सुंदर-सुंदर किताबों का चयन करती नजर आ रही हैं, बेटे में संस्कारों का पोषण करने के लिए धार्मिक से लेकर शिक्षाप्रद की कहानियों तक का कलेक्शन करने में जुटी हैं।
बेटों में संस्कारों का बीजारोपण
बेटे अंगद और अर्जुन में संस्कारों का बीजारोपण ममता का असीम संसार समेटे दिखाई दे रहा है, जोकि उन माताओं को भी प्रेरणा दे रहा है, जोकि बच्चों को मोबाइल की दुनिया में जाने से नहीं रोक पा रही है। अगर बच्चे को किताबों के संसार के बारे में जानकारी दी जाए, तो आने वाले वक्त में बच्चा साहित्य के साथ-साथ संस्कारों का वटवृक्ष बनकर उभरेगा। इसी बात को भलीभांति समझने वालीं डॉ. हाड़ा आज के समय में प्रेरणामयी मां के रुप में सामने आई है, जोकि एक राजनेता और डॉक्टर की भूमिका को भी बखूबी ढंग से निभा रही हैं।
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किताबों में शिक्षा का भंडार – डॉ. दीप्ति सिंह हाड़ा
डॉ. दीप्ति सिंह हाड़ा ने बताया कि किताबों में छिपा शिक्षा का भंडार होता है, आज के समय में माता-पिता की व्यस्तता होती है, फिर भी मैं अपने व्यस्ततम समय में से निकाल कर गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों पर पूरा फोकस कर रही हूं, उनके पूरे दिन का टाइम कैसे उपयोग हो सके, इसके लिए सुबह शाम आउटडोर एक्टिविटी एवं दिन में उनकी रुचि की किताबों में लगे, इसके लिए रोचक किताबों का चयन किया है। मुझे भी शुरु से किताबों से बेहद ही प्यार रहा है, क्योंकि इसी में ज्ञान का भंडार छिपा होता है। उसी का नतीजा है कि इन पन्नों के बीच छिपे अक्षरों से मिली शिक्षा के दम पर आज कई जिम्मेदारियों को आसानी से निभा रही हूं। अन्य माताओं से अपील करते हुए डॉ. हाड़ा कहती हैं कि बच्चों को किताबों के करीब लाने की सख्त जरुरत हैं, क्योंकि डिजिटल युग में यही वो चीज है, जो बच्चों को गलत आदतों की बजाय उच्च कोटि के विचारों के करीब ला सकती है।
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