इंदौर/आई संवाद/ 7 जून को विश्व पोहा दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य इंदौर के प्रसिद्ध पोहे को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाना और लोगों को पौष्टिक नाश्ते के प्रति जागरूक करना है। स्वाद, सादगी और सेहत का अनूठा संगम माने जाने वाले इंदौरी पोहे ने आज शहर की संस्कृति और पहचान का रूप ले लिया है।
राजबाड़ा पर होगी भव्य पोहा पार्टी
विश्व पोहा दिवस 7 जून, रविवार को बीजेपी विधायक रमेश मेंदोला और इंदौर उत्सव समिति की तरफ से ‘भव्य पोहा पार्टी’ का आयोजन किया गया है। शहर के केंद्र राजबाड़ा पर सुबह 8.30 बजे पोहा पार्टी की शुरुआत हो जाएगी। जिसमें इंदौरवासी अपने प्रिय स्वादिष्ट नाश्ते पोहा का जीरावन के साथ आनंद लेंगे। इसी तरह विश्व पोहा दिवस पर ‘इंदौरी पोहा, इंदौरी बात, महापौर के साथ’ कार्यक्रम का आयोजन सुबह 7.30 बजे से विश्राम बाग, इंदौर में शहरवासी स्वादिष्ट इंदौरी पोहा का स्वाद चखेंगे। जिसमें महापौर पुष्यमित्र भार्गव शामिल होंगे।
सुबह की शुरुआत पोहे के साथ
इंदौर में सुबह का नजारा पोहे के बिना अधूरा माना जाता है। शहर में हर दिन करीब 90 टन पोहे की खपत होती है, जबकि रविवार और छुट्टियों के दिनों में यह आंकड़ा और बढ़ जाता है। अलसुबह से लेकर देर रात तक शहर के हजारों ठेलों, दुकानों और होटलों पर पोहा लोगों की पहली पसंद बना रहता है।
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देश-दुनिया तक पहुंचा इंदौरी स्वाद
इंदौर के पोहे की लोकप्रियता अब मालवा क्षेत्र तक सीमित नहीं रही। देश के कई बड़े शहरों में ‘इंदौरी पोहा’ के नाम से यह व्यंजन परोसा जा रहा है। वहीं अमेरिका, कनाडा, जापान सहित कई देशों में भी इसकी पहचान बन चुकी है। इंदौर में पोहे की पांच हजार से अधिक दुकानें और नाश्ता केंद्र संचालित हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं।
1949 में शुरू हुई थी पोहे की पहली प्रसिद्ध दुकान
इंदौर में पोहे की लोकप्रियता की शुरुआत वर्ष 1949 में हुई थी, जब अन्ना जोशी ने ‘प्रशांत पोहा हाउस’ की स्थापना की। महाराष्ट्र से पढ़ाई के लिए इंदौर आए अन्ना जोशी ने शिक्षा पूरी करने के बाद अपनी बुआ से लिए गए एक हजार रुपये की सहायता से यह व्यवसाय शुरू किया था। उस दौर में कपड़ा मिलों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सस्ता, स्वादिष्ट और जल्दी मिलने वाला नाश्ता उपलब्ध कराना उनका उद्देश्य था। धीरे-धीरे यह स्वाद पूरे शहर की पहचान बन गया।
उसल-पोहे ने बढ़ाई लोकप्रियता
कपड़ा मिलों के दौर में मजदूर वर्ग अपने साथ उसल ले जाया करता था। उनकी मांग पर इसे अधिक मसालेदार और तीखा बनाया जाने लगा। समय के साथ उसल-पोहे का यह संयोजन बेहद लोकप्रिय हो गया। राजस्थान से आए लोगों द्वारा शुरू की गई यह परंपरा आज भी इंदौर की खानपान संस्कृति का अहम हिस्सा है। खासकर तीखे उसल-पोहे का स्वाद आज भी लोगों को खूब पसंद आता है।
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स्वास्थ्यवर्धक और किफायती नाश्ता
विशेषज्ञों के अनुसार पोहा हल्का, पौष्टिक और जल्दी पचने वाला भोजन है। यही वजह है कि यह सभी आयु वर्ग के लोगों की पसंद बना हुआ है। विश्व पोहा दिवस के अवसर पर लोगों से अपील की जाती है कि वे फास्ट फूड की बजाय पोहे जैसे पारंपरिक और स्वास्थ्यवर्धक नाश्ते को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
इंदौर के प्रसिद्ध पोहा केंद्र
शहर के कई इलाकों में पोहे की ऐसी दुकानें हैं जो वर्षों से लोगों की पसंद बनी हुई हैं। राजबाड़ा, छप्पन दुकान, आनंद बाजार, मल्हारगंज, जेल रोड, गोराकुंड, मालगंज, बड़ा गणपति, मालवा मिल, पाटनीपुरा, एलआईजी, एमआईजी और महू नाका जैसे क्षेत्रों में सुबह से ही पोहा प्रेमियों की भीड़ देखने को मिलती है।
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