भोपाल/ आई संवाद/ मध्यप्रदेश में राज्यसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। वहीं कांग्रेस ने अपने सभी विधायकों को 17 जून तक कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में रखने का फैसला किया है। पार्टी का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी चुनाव से पहले कांग्रेस विधायकों में सेंध लगाने और क्रॉस वोटिंग कराने की कोशिश कर रही है। ऐसे में विधायकों को एकजुट बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
बीजेपी पर लगाए विधायकों को तोड़ने के आरोप
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि BJP कांग्रेस विधायकों को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कुछ विधायकों के पास नोटों से भरे बैग लेकर लोग पहुंचे, लेकिन कांग्रेस विधायकों ने ऐसे प्रस्तावों को ठुकरा दिया। सिंघार ने कहा कि राज्यसभा चुनाव में बीजेपी की सभी रणनीतियां विफल साबित होंगी।
पार्टी आलाकमान के निर्णय पर बेंगलुरु रवाना हुए विधायक
सौंसर विधायक विजय चौरे, यादवेंद्र सिंह और बाबू जंडेल सहित कई कांग्रेस नेताओं ने पुष्टि की कि सभी विधायकों को बेंगलुरु भेजा जा रहा है। यादवेंद्र सिंह ने बताया कि कुछ विधायक बाहर जाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व के निर्देशों का पालन करते हुए सभी को एक साथ रखा जा रहा है ताकि किसी प्रकार की टूट-फूट की संभावना न रहे।
ये भी पढ़ें – कुबेरेश्वरधाम में गेट बंद होने से भड़के व्यापारी… सड़क पर उतरकर शुरू किया धरना!
विधानसभा में विधायकों की संख्या
230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान प्रभावी संख्या 229 है। बीजेपी के पास 164 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 64 सदस्य हैं। भारत आदिवासी पार्टी के पास एक विधायक है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के कारण एक सीट रिक्त है।
उमंग सिंघार के घर हुई विधायकों की अहम बैठक
राज्यसभा चुनाव की रणनीति को लेकर सोमवार देर रात विपक्ष के नेता उमंग सिंघार के निवास पर कांग्रेस विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में लगभग 60 विधायक मौजूद रहे। वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने ऑनलाइन माध्यम से चर्चा में हिस्सा लिया, जबकि एक विधायक दिल्ली में होने के कारण बैठक में शामिल नहीं हो सके।
ये भी पढ़ें – महाकाल मंदिर में ‘पुष्पा’ अवतार की एंट्री… वीडियो वायरल होते ही प्रशासन ने लिया सख्त एक्शन!
कानूनी विवाद चलते संख्या में हो सकती कमी
इसके अलावा, विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा को हाई कोर्ट द्वारा मतदान से रोका गया है। वहीं बीना विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर भी कानूनी विवाद चल रहा है। ऐसे में कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 तक पहुंच सकती है।
2020 के सियासी घटनाक्रम से ली सबक
कांग्रेस इस बार किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है। पार्टी को वर्ष 2020 का राजनीतिक घटनाक्रम याद है, जब ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद कमलनाथ सरकार गिर गई थी। इसी अनुभव को देखते हुए कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव से पहले अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति अपनाई है।
राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस ने डीनर पॉलिटिक्स के जरिए बनाई रणनीति.. विधायकों की बेंगलुरु में बाड़ाबंदी!









