इंदौर/आई संवाद/ किसी समय मालवा की जीवन रेखा कही जाने वाली गंभीर नदी को फिर से जीवित करने की तैयारी शुरु हो चुकी है। प्रशासन स्तर पर जीआईएस आधारित रिवर रीजुवनेशन प्लान तैयार किया जा रहा है। नदीं के उद्गम से लेकर डाउन स्ट्रीम तक के लिए योजना का तैयार की गई है। जल संरक्षण, वॉटर रिचार्जिंग, प्रदूषण नियंत्रण और बाढ़ क्षेत्र बचाने का प्रयास का किया जा रहा है। बाढ़ वाले इलाकों को बचाने के लिए 309 स्थानों का चयन किया गया है। रिपोर्ट में गवली पलासिया, डोंगरगांव, महू गांव, सांतेर, कवटी, भाटखेड़ी, सोनवाय, भैंसलाय और हरनियाखेड़ी को अति प्रदूषण वाला क्षेत्र माना गया है।
बढ़ती पानी की समस्या से निदान की तैयारी
इंदौर जिले में पानी की समस्या विकराल रुप लेती जा रही है, जिससे निपटने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, इसीलिये एक बार फिर गंभीर नदी को जिंदा करने की तैयारी शुरु की गई है। मध्यप्रदेश सरकार के जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत नदी की जीवित करने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। कभी सालभर बहने वाली गंभीर नदी हालिया दौर में बरसाती नदी बनकर रह गई है, जिसके संरक्षण के लिए एक बार फिर प्रयास किया जा रहा है। नदी के आसपास के गाद भराव, अतिक्रमण और भूजल दोहन, पारंपरिक जल स्त्रोत खत्म होने के हालात बने हुए हैं। कई इलाकों के हालत यह हैं कि भू-जलस्तर 300 फीट के नीचे पहुंच चुका है। जिसे फिर से जीवित करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
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पौधारोपण कर जमीन में उतारेंगे पानी
गंभीर नदी को पुनर्जीवित करने के प्लान के तहत महू के पहाड़ी इलाके में कंटूर खाई, क्रमानुसार गड्ढे, सभी जगह पर मेडबंदी और बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा। आने वाले बारिश के सीजन से पौधारोपण अभियान को नया रुप दिया जाएगा। ताकि बारिश का पानी जमीन में उतर सके। बीच के प्रवाह वाले इलाकों में छोटे बांध, खेत तालाब और पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण कराया जाएगा। नदी में से गाद हटाने के साथ, गहरीकरण, नदी किनारों को मजबूत करने और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी की जाएगी।
तीन फेज में होगा काम
पहले चरण के तहत 20 हजार मीटर नाला ट्रेंचिंग, 450 बोल्डर चेक, 9 रिचार्ज साफ्ट और 50 हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। दूसरे चरण में 219 हेक्टेयर अतिक्रमण हटाने, 14 चेकडेम और 9 एसटीपी बनाने का काम किया जाएगा। तीसरे चरण में मरम्मत और मेंटेनेंस किया जाएगा। जिसके लिए जनभागीदारी का सहारा लेने की तैयारी चल रही है। योजना में पंचायतों, किसानों और अन्य समितियों से भी संपर्क स्थापित किया जाएगा, ताकि स्थानीय मॉनिटरिंग होने के साथ जनभागीदारी का काम भी आगे बढ़े सके।
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