बीजेपी के नेता नहीं मान रहे पीएम मोदी की बात... अब क्या होगा इसके पश्चात?

MP बीजेपी के विधायकों का निरस रवैया… अपने समर्थकों के नहीं दे रहे नाम!

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भोपाल/आई संवाद/ मध्यप्रदेश में निगम-मंडल और प्राधिकरणों में नियुक्तियों का दौर शुरु हुआ था, दो-तीन दिन धमाकेदार नियुक्तियां की गई, परंतु कुछ दिन के बाद टकटकी लगाए नेताओं के हाथ निराशा लग रही है, चूंकि सत्ता और संगठन में समन्वय के आधार पर नियुक्तियां होना है, जिसके लिए स्थानीय नेताओं से नाम मांगे गए थे, इनमें जिला स्तरीय समितियां भी शामिल है, पर विधायकों की तरफ से नाम नहीं दिए जाने के कारण पार्टी आलाकमान तक सूची नहीं पहुंचने से प्रक्रिया धीमी पड़ गई है, जिस पर संगठन जल्द कड़े निर्णय ले सकता है।

सरकार, संगठन की इच्छा की उपेक्षा
बीजेपी संगठन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की स्पष्ट मंशा है कि जल्द समितियों समेत तमाम निगम-मंडल, प्राधिकरणों में नियुक्तियां हो जाए, ताकि लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं को सत्ता के सुख का अनुभव कराया जाए, बावजूद इसके विधायकों ने अब तक अपने ही समर्थकों के नाम नहीं दिए हैं, जबकि स्पष्ट रुप से कहा गया था कि संगठन को अपनी पसंद बता दें, ताकि जल्द से जल्द प्रक्रिया को पूरा किया जाए, जिसमें अब सीधे आलाकमान इस समस्या का हल निकालने वाला है। इसके बावजूद कई विधायकों द्वारा नाम न दिए जाने से संगठनात्मक असंतोष की स्थिति बनती नजर आ रही है।

कई समितियों का होना है गठन
पार्टी सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने नगर और जिला स्तर पर कई समितियों में खाली जगहों को भरना है, जिसमें 25 से अधिक समितियों के 250 से ज्यादा पद शामिल है, लेकिन विधायकों की तरफ से नाम नहीं आने के चलते समितियों की घोषणा नहीं हो पाई है, जबकि प्रादेशिक स्तर पर लगभग सभी समितियों का गठन किया जा चुका है। जानकारी यह भी है कि विधायकों के समर्थकों में से पद की चाह रखने वालों की संख्या ज्यादा होने के चलते, वो भी पशोपेश की स्थिति में है, जिस पर जल्द निर्णय होने की संभावना जताई जा रही है।

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नगर के प्रशिक्षण वर्ग होंगे शुरु
एमपी बीजेपी के आगामी 30 और 31 मई से प्रशिक्षण वर्ग शुरु होने वाले हैं, ऐसे में लगभग 40 कार्यकारिणी सदस्यों की घोषणा होनी है, जिसके चलते प्रदेश संगठन ने टारगेट दे दिया है कि जल्द इस काम को पूरा किया जाए, यदि विधायकों की ओर से नाम नहीं आते हैं तो संगठन अपने स्तर पर चयन प्रक्रिया पूरी कर सकता है। इससे यह संदेश भी जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व अब देरी या अनिच्छा को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।

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