नरवाई जलाने से पर्यावरण और भूमि को नुकसान, किसानों से वैकल्पिक प्रबंधन अपनाने की अपील —–

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नरवाई जलाने से पर्यावरण और भूमि को नुकसान, किसानों से वैकल्पिक प्रबंधन अपनाने की अपील
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कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने हार्वेस्टर संचालकों और किसानों की बैठक ली

इंदौर जिले में फसल कटाई के बाद खेतों में नरवाई (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं को रोकने तथा किसानों को वैकल्पिक प्रबंधन के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने हार्वेस्टर संचालकों और किसानों की बैठक ली। बैठक में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा नरवाई जलाने से होने वाले दुष्प्रभावों तथा उसके वैज्ञानिक प्रबंधन के तरीकों की विस्तृत जानकारी दी गई।
कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे भूमि में उपस्थित लाभकारी जीवाणु एवं सूक्ष्म पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं, जिससे उत्पादन क्षमता घटती है। साथ ही वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है, जिससे मानव स्वास्थ्य पर गंभीर विपरीत प्रभाव पड़ता है। धुएँ के कारण श्वसन संबंधी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है तथा सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी रहती है।
बैठक में वैज्ञानिकों ने किसानों को नरवाई प्रबंधन के विभिन्न विकल्पों की जानकारी देते हुए बताया कि फसल अवशेषों का उपयोग खेत में ही मल्चिंग, जैविक खाद निर्माण, पशु चारे तथा अन्य उपयोगों में किया जा सकता है। इसके लिए हैप्पी सीडर, सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (SMS) सहित अन्य कृषि यंत्रों के उपयोग की भी जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि नरवाई को जलाने के बजाय खेत में मिलाने से मिट्टी की संरचना सुधरती है और उत्पादन लागत में भी कमी आती है।
कलेक्टर श्री शिवम वर्मा ने कहा कि नरवाई जलाना न केवल कानूनन प्रतिबंधित है, बल्कि यह पर्यावरण और कृषि दोनों के लिए हानिकारक है। उन्होंने हार्वेस्टर संचालकों को निर्देश दिए कि वे मशीनों में स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग सुनिश्चित करें, ताकि खेतों में अवशेष व्यवस्थित रूप से फैलें और किसानों को नरवाई जलाने की आवश्यकता न पड़े।
कलेक्टर श्री वर्मा ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे नरवाई नहीं जलाएं और वैज्ञानिक तरीकों से उसका प्रबंधन करें। प्रशासन द्वारा जागरूकता, प्रशिक्षण और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और भूमि की उर्वरता बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक, हार्वेस्टर संचालक तथा किसान उपस्थित रहे।

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