वरिष्ठजनों के लिए हॉलिस्टिक वेल-बीइंग कैंप का हुआ आयोजन
इंदौर,राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत संभागीय आयुष अधिकारी डॉ. मीना भायल एवं जिला आयुष अधिकारी डॉ. हंसा बारिया के निर्देशन में आयुष विंग जिला चिकित्सालय एवं शासकीय होम्योपैथी औषधालय सुदामा नगर द्वारा अमरलाल सेवा ट्रस्ट परिसर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक विशेष हॉलिस्टिक वेल-बीइंग कैंप का आयोजन किया गया, इस शिविर का उद्देश्य वरिष्ठजनों के शारीरिक, मानसिक एवं सामाजिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ नियमित योग अभ्यास के साथ हुआ, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों को उनकी आयु एवं स्वास्थ्य स्थिति के अनुरूप सरल एवं प्रभावी योगाभ्यास कराए गए, योग विशेषज्ञों ने बताया कि नियमित योग शरीर को सशक्त बनाने के साथ मानसिक संतुलन और सकारात्मक ऊर्जा का भी संवर्धन करता है।
शिविर में वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ एवं गुदा रोग विशेषज्ञ डॉ. शीतल कुमार सोलंकी, आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी एवं बाल रोग विशेषज्ञ, योग विशेषज्ञ डॉ. बख्त्यार अशरफी द्वारा वरिष्ठजनों को स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन प्रदान किया गया। होम्योपैथिक चिकित्सा अधिकारी डॉ. रचना रघुवंशी की विशेष उपस्थिति रही। कंपाउंडर कांजीलाल दामके, जयंत जायसवाल, प्रेम ठाकुर, प्रदीप शर्मा, प्रकाश मसानिया एवं मदन दादा की सक्रिय सहभागिता से शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
चिकित्सकों द्वारा सभी वरिष्ठ नागरिकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया तथा आवश्यकतानुसार आयुष औषधियों का निःशुल्क वितरण किया गया। इसके अतिरिक्त स्वस्थ जीवनशैली हेतु दिनचर्या एवं ऋतुचर्या के सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया, जिससे वरिष्ठजन प्राकृतिक एवं संतुलित जीवन पद्धति अपनाकर अपने स्वास्थ्य का संरक्षण कर सकें।
मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाए रखने के उद्देश्य से हंसी-मजाक, विनोद-प्रमोद तथा छोटे-छोटे खेलों का भी आयोजन किया गया। इससे वातावरण में आत्मीयता, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ। उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों ने इस पहल को अत्यंत उपयोगी बताते हुए आयोजन की सराहना की।
आयोजकों ने बताया कि इस प्रकार के शिविर न केवल आयुष पद्धति के प्रति जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि समाज में वरिष्ठ नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजनों को निरंतर जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया गया।
आयोजकों ने भावुक शब्दों में कहा कि वरिष्ठजनों का आशीर्वाद ही समाज की सबसे बड़ी पूँजी है। उनके सान्निध्य में आकर ऐसा अनुभव हुआ मानो जीवन की जड़ों से पुनः जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ हो। ईश्वर से प्रार्थना है कि हमें बार-बार ऐसे ही सेवा कार्यों में सम्मिलित होने का अवसर प्रदान करें, ताकि समाज के इन आदरणीय स्तंभों के साथ समय बिताने का सौभाग्य निरंतर मिलता रहे।










